वृन्दावन की यात्रा
वृन्दावन
वृन्दावन मैं बहुत
बार गया हूँ. परन्तु हर बार एक नया ही अनुभव होता है. बहुत अच्छी Energy है वहां
की. वृन्दावन एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ दिन रात ईश्वर के नाम का जाप चलता रहता है.
आज भी यहाँ बहुत से तपस्वी तपस्या कर रहे है. मैं स्वयं ऐसे कुछ तपस्वियों से मिला
हूँ जो दिन में केवल एक घंटे के लिए ही निकलते है और उसी दौरान ही आप उनसे मिल
सकते हो.
वहां घुमने के लिए साइकिल
रिक्शा या फिर बैटरी रिक्शा ठीक रहता है. क्यूंकि बहुत से मंदिर तंग गलियों में है
या बहुत से मंदिरों में जाने के लिए तंग गलियों से गुजरना पड़ता है. शनिवार और
रविवार को हमेशा ही काफी भीड़ रहती है. इसके इलावा कोई महोत्सव हो तो और भी ज्यादा
भीड़ रहती है. इसलिए यदि आराम से बिना भीड़भाड़ के घूमना हो तो शनिवार, रविवार को मत
जाये. लेकिन जब भी जाये तो कौशिश करे की रहने का इंतजाम करके ही जाये.
वृन्दावन के मन्दिर
बांकेबिहारी मन्दिर - जो भक्त वृन्दावन जाते
रहते है वो बांके बिहारी जी के मंदिर में अवश्य जाते है. कहते है कि स्वामी हरिदास
जी ने श्रीकृष्ण जी को यहाँ मूर्ति के रूप में प्रकट किया था. बांके बिहारी मंदिर भारत में मथुरा जिले के
वृंदावन धाम में रमण रेती पर स्थित है। यह भारत के प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिरों
में से एक है। बांके बिहारी कृष्ण का ही एक रूप है जो इसमें प्रदर्शित किया गया
है। इसलिए इस मंदिर की वृन्दावन में काफी मान्यता
है. इसलिए यहाँ भीड़भाड़ भी बहुत होती है.
| बांके बिहारी मंदिर |
प्रेम मंदिर - इस मन्दिर का
शिलान्यास 14 जनवरी 2001 को कृपालुजी महाराज द्वारा किया गया था। ग्यारह वर्ष के
बाद तैयार हुआ यह भव्य प्रेम मन्दिर सफेद इटालियन करारा संगमरमर से तराशा गया है। यह मन्दिर प्राचीन भारतीय शिल्पकला के
पुनर्जागरण का एक नमूना है।
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| प्रेम मंदिर रात का दृश्य |
सम्पूर्ण मन्दिर ५४ एकड़ में बना है तथा इसकी ऊँचाई 125 फुट, लम्बाई 122 फुट तथा चौड़ाई 115 फुट है। इसमें
फव्वारे, राधा-कृष्ण की मनोहर
झाँकियाँ, श्री गोवर्धन लीला,
कालिया नाग दमन लीला, झूलन लीला की झाँकियाँ उद्यानों के बीच सजायी गयी है। यह
मन्दिर वास्तुकला के माध्यम से दिव्य प्रेम को साकार करता है। सभी वर्ण, जाति, देश के लोगों के लिये खुले मन्दिर के लिए द्वार सभी दिशाओं में खुलते है।
मुख्य प्रवेश द्वारों पर आठ मयूरों के नक्काशीदार तोरण हैं तथा पूरे मन्दिर की
बाहरी दीवारों पर राधा-कृष्ण की लीलाओं को शिल्पांकित किया गया है। इसी प्रकार
मन्दिर की भीतरी दीवारों पर राधाकृष्ण और कृपालुजी महाराज की विविध झाँकियों का भी
अंकन हुआ है।
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| प्रेम मंदिर रात का सीन |
रात को विभिन्न प्रकार की रोशनियों से यह मंदिर जगमगा उठता है. इसलिए इस मंदिर
को रात में देखने का अलग ही मज़ा है.
ISKCON मंदिर वृन्दावन - वृन्दावन में स्थित यह इस्कॉन मंदिर अंग्रेज-मन्दिर
के नाम से भी जाना जाता है। इस्कॉन (ISKCON - International Society for
Krishna Consciousness) - कृष्ण जागरण के
लिये अंतर्राष्ट्रीय संस्था का छोटा नाम है जिसकी स्थापना स्वामी प्रभुपाद जी ने
की थी।
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| ISCKON Temple Vrindavan |
केसरिया वस्त्रों में हरे रामा–हरे कृष्णा की
धुन में तमाम विदेशी महिला–पुरुष यहाँ देखे
जाते हैं और उन्हीं की उपस्थिति की वज़ह से इस मंदिर को अंग्रजों के मन्दिर का नाम
मिला। इसमें राधा कृष्ण की भव्य एवं काफी सुन्दर मूर्तियाँ हैं। इस मंदिर में
कीर्तन हरे रामा–हरे कृष्णा की
धुन में मस्त हो जाना नेचुरल बात है. यहाँ की हरे रामा–हरे कृष्णा की धुन में कोई भी थिरके बिना नहीं रह सकता.
निधिवन - वृन्दावन का
एक ऐसा स्थान जो की रहस्यमयी है. कहते है भगवान् श्रीकृष्ण आज भी यहाँ रात को आकर
रासलीला रचाते है. इसलिए ही रात होते होते इस मंदिर में रहस्य गहरा होता जाता है.
परन्तु इस रास लीला को देखना मना है और इसलिए ही इस निधिवन के आसपास जो इमारतें
बनी है उनमे निधिवन की तरफ कोई खिड़की नहीं है. अगर किसी घर में खिड़की है भी तो वो
भी शाम की आरती होने के बाद अच्छी तरीके से बंद कर दी जाती है . इसलिए इस निधिवन
में दिन में ही घुमा जा सकता है रात को नहीं. शाम होते ही मंदिर बंद कर दिया जाता
है और देख रेख में ताला लगा दिया जाता है.
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| निधिवन वृन्दावन |
खाना-खज़ाना
अब बात खाने की करते
है कि वृन्दावन में खाने के कैसे कैसे व्यंजन उपलब्ध है उनके बारे में मैं आपको
बताऊगा और एड्रेस सहित बताऊगा. देखिये वृन्दावन भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के
मथुरा जिले में आता है. तो उत्तरप्रदेश खाने पीने की तरह-तरह की उम्दा चीजे चीजों
के लिए मशहूर है. आप भारत के किसी भी क्षेत्र से यहाँ आते है आपको यहाँ का लज़ीज़
खाना बहुत पसंद आएगा. यहाँ आपको देसी थाली जिसमे दाल, चावल, सब्जी, रोटी,
दही/रायता, सलाद, पापड़ के साथ मिल जाएगी जो की बड़ी उम्दा किस्म की होती है. मैं
जहाँ रुकता हूँ उस जगह का नाम है बाल गोपाल ट्रस्ट है वहा की रसोई में देसी घी से
खाना बनता है और बिलकुल सही प्राइस पर मिल जाता है. एक थाली 70 - 80 रूपये में मिलती
है.
श्री बांके बिहारी
मंदिर के आसपास खाने पीने की काफी लज़ीज़ वस्तुएं मिल जाती है. ख़ासतौर सुबह नाश्ते
और शाम के अल्पाहार के लिए. सुबह लगभग 8 बजे के बाद आपको मंदिर के आस पास चाय
नाश्ता बिलकुल उचित prices पर मिल जायेगा.
श्री बांके बिहारी
मंदिर जाने वाली गली के पहले बाज़ार में बहुत सी खाने पीने की दुकाने है. इसी बाज़ार
में एक दूकान है यहाँ पहले एक रेहड़ी लगा करती थी उसी रेहड़ी वाले ने ही दूकान बना
ली है.
यहाँ आपको हींग
कचोरी सब्जी, पूरी सब्जी बहुत ही उचित रेट पर मिल जाएगी इसका जायका इतना बढ़िया है
की आपको एक ही बार में पसंद आ जायेगा. सबसे खास बात यह है कि इनकी कचोरी और पूरी
सब्जी खाने से कोई एसिडिटी नहीं होगी और यह खाना 2-3 घंटो में पच भी जाता है.
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| हींग पूरी कचोरी की दूकान |
इसके पास ही आपको
बढ़िया किस्म की चाय मिल जाएगी इस दूकान के साथ लगते ही एक छोटी सी चाय की दूकान भी
है.
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| लस्सी की दूकान |
यही थोड़ी सी आगे ही लस्सी
की दूकान है. लस्सी की यही पर कई दुकाने है. मैं अच्छे Taste वाली दूकान की
picture यहाँ नीचे दे रहा हूँ.
मथुरा वृन्दावन के
पेडे बहुत मशहूर है. परन्तु यहाँ श्री बांके बिहारी मंदिर के आसपास एक-दौ दुकाने
ही अच्छी है जिनके पेडे अच्छी क्वालिटी के है. एक तो बांकेलाल पेडे वाला - यहाँ
आपको और मिठाईयां भी मिल जाएगी. इस दूकान की रबड़ी भी बहुत स्वादिष्ट होती है. इसके
बिलकुल साथ लगती भी एक चाय की दूकान है जिसकी चाय काफी बढ़िया होती है.
इसके इलावा इस बाज़ार
में गुजरती ढोकला, मटर टिक्की, दाल का चिल्ला ठीक दामों में मिल जायेगा.
वृन्दावन आप जाते है
तो यहाँ की लस्सी और रबड़ी तो जरुर से जरुर try करे.
इसके इलावा यहाँ
आपको, साउथ इंडियन खाना, नोर्थ इंडियन खाना, हींग वाली पूरी, हींग वाली कचोरी, आलू
की सब्जी के साथ, मसाला डोसा, पीज़ा.
वैसे तो जहाँ आप
रुके होगे वहा भी रसोई बनती है परन्तु फिर भी मैं आपको कुछ और दुकानों के बारे में
बताऊगा जहाँ जहाँ मैंने खाना खाया है.
ब्रिजवासी
यहाँ की मिठाइयाँ उम्दा किस्म की होती है यहाँ नीचे मिठाइयाँ और उपरी मंजिल पर Restaurent है . खाना अच्छा और साफ़ सुथरा होता है.
कान्हा की पंजाबी रसोई
रमणरेती मार्ग पर एक
है 'ढाबा कान्हा की पंजाबी रसोई' यहाँ आपको सुबह का नाश्ता, फिर लंच और डिनर मिलता
है. इनके रेट काफी वाजिब है और क्वालिटी काफी अच्छी.
किन किन बातों का ख्याल रखे
रिक्शा करते वक्त
भाडा पहले से तय कर ले. आमतौर पर दस् रूपये प्रति सवारी किराया रहता है परन्तु
ज्यादा दूर जाना हो तो किराया तय करना पड़ता है.
वृन्दावन में काफी
ज्यादा बन्दर है इसलिए कौशिश करे घूमते वक्त हाथ में थैला या कोई पॉलिथीन बैग
वैगरह न रखे क्यूंकि बंदरो का पता नहीं कि कब आकर झपट्टा मार कर आपके हाथ से खीच
जाये और वहा ऐसा अक्सर होता रहता है.
हाथ के सामान के
साथ-साथ मैंने देखा है कि बन्दर चश्मों पर सबसे ज्यादा झपट्टा मारते है. ऐसा भी मैंने
कई बार देखा है कि आपने चश्मा डाला हुआ है और बन्दर आया और लेकर वो उड़ गया.
अगर ऐसा हो जाये तो
तुरंत आप कुछ खाने की चीज बन्दर की ओर उछाले तो ही वो आपका सामान या चश्मा वापिस
फैंकेगा. लेकिन सबसे ज्यादा जरुरी है कि ध्यान से चले.
कुछ मंदिर दिन में
जाने का फायदा है और कुछ रात में. जैसे अगर आप तटीय स्थान जाते है तो दिन में
जाईये और यदि प्रेम मंदिर देखना चाहते है तो शाम ढलने के बाद देखिये.
भिखारी वहां काफी
ज्यादा तादाद में है इसलिए थोडा सा बच कर चले. मैं व्यक्तिगत तौर पर भीख देना गलत
मानता हूँ. और हमारे ग्रंथो में भी इस तरह से दिए गए दान की कोई वैल्यू नहीं है.
यानि दान सुपात्र को ही दिया जाता है.
अपने मोबाइल का खास
तौर पर ख्याल रखे क्यूंकि मंदिरों में खास तौर शनिवार, रविवार या किसी आयोजन के
दौरान काफी भीड़ हो जाती है तो मोबाइल चोरी हो जाना एक आम बात हो गयी है. अगर आपका
मोबाइल चोरी हो जाये तो उसकी पुलिस में रिपोर्ट जरुर से जरुर कराये. यह रिपोर्ट
ऑनलाइन भी करवाई जा सकती है. जिसका लिंक यहाँ नीचे मैं दे रहा हूँ. और यदि आप
स्मार्ट फ़ोन यूज़ करते है तो उत्तर प्रदेश पुलिस का अपना एक एप्प भी है जिसे आप
एप्प स्टोर से डाउनलोड करके अपने फ़ोन में इनस्टॉल करके अपनी रिपोर्ट एप्प से भी
करवा सकते है. नहीं तो जगह जगह पर पुलिस चौकियां बनी हुई है वहा आप रिपोर्ट लिखवा
कर उसकी कापी अवश्य ले लें. एक बात और जो कि बहुत जरुरी है की जब आप रिपोर्ट लिखवा
रहे हो ऑनलाइन या पुलिस चौकी पर तब फ़ोन गुम होने का टाइम जरुर से जरुर मेंशन करे.
ऑनलाइन शिकायत का
लिंक - http://164.100.181.132:41/Home/Register
यमुना के घाट
वृन्दावन में यमुना के तट पर अनेक घाट हैं। वृन्दावन की यात्रा यमुना नदी में
भ्रमण के बैगर अधूरी है. यहाँ ले प्रसिद्ध घाटों पर छोटी-बड़ी नावं उपलब्ध रहती है.
आप ग्रुप में हो तो और भी मज़ा आता है और यदि अपनी छोटी फॅमिली के साथ हो तो नावं
personal भी बुक कर सकते है. परन्तु नावं बुक करने के लिए मोल-भाव तो करना ही पड़ता
है. आमतौर पर नावं वाले 10-12 मिनट्स नावं यमुना में घुमा कर वापिस ले कर आ जाते
है इसलिए समय भी तय कर ले की कितनी देर यमुना भ्रमण करवाया जायेगा.
यह कुछ प्रसिद्द
घाट है वृन्दावन के-
- श्रीवराहघाट- वृन्दावन के दक्षिण-पश्चिम दिशा में प्राचीन यमुनाजी के तट पर श्रीवराहघाट अवस्थित है। तट के ऊपर भी श्रीवराहदेव विराजमान हैं। पास ही श्रीगौतम मुनि का आश्रम है।
- कालीयदमनघाट- इसका नामान्तर कालीयदह है। यह वराहघाट से लगभग आधे मील उत्तर में प्राचीन यमुना के तट पर अवस्थित है। यहाँ के प्रसंग के सम्बन्ध में पहले उल्लेख किया जा चुका है। कालीय को दमन कर तट भूमि में पहुँच ने पर श्रीकृष्ण को ब्रजराज नन्द और ब्रजेश्वरी श्री यशोदा ने अपने आसुँओं से तर-बतरकर दिया तथा उनके सारे अंगो में इस प्रकार देखने लगे कि 'मेरे लाला को कहीं कोई चोट तो नहीं पहुँची है।' महाराज नन्द ने कृष्ण की मंगल कामना से ब्राह्मणों को अनेकानेक गायों का यहीं पर दान किया था।
- सूर्यघाट- इसका नामान्तर आदित्यघाट भी है। गोपालघाट के उत्तर में यह घाट अवस्थित है। घाट के ऊपर वाले टीले को आदित्य टीला कहते हैं। इसी टीले के ऊपर श्रीसनातन गोस्वामी के प्राणदेवता श्री मदन मोहन जी का मन्दिर है। उसके सम्बन्ध में हम पहले ही वर्णन कर चुके हैं। यहीं पर प्रस्कन्दन तीर्थ भी है।
- युगलघाट- सूर्य घाट के उत्तर में युगलघाट अवस्थित है। इस घाट के ऊपर श्री युगलबिहारी का प्राचीन मन्दिर शिखरविहीन अवस्था में पड़ा हुआ है। केशी घाट के निकट एक और भी जुगल किशोर का मन्दिर है। वह भी इसी प्रकार शिखरविहीन अवस्था में पड़ा हुआ है।
- श्रीबिहारघाट- युगलघाट के उत्तर में श्रीबिहारघाट अवस्थित है। इस घाट पर श्रीराधाकृष्ण युगल स्नान, जल विहार आदि क्रीड़ाएँ करते थे।
- श्रीआंधेरघाट- युगलघाट के उत्तर में यह घाट अवस्थित हैं। इस घाट के उपवन में कृष्ण और गोपियाँ आँखमुदौवल की लीला करते थे। अर्थात् गोपियों के अपने करपल्लवों से अपने नेत्रों को ढक लेने पर श्रीकृष्ण आस-पास कहीं छिप जाते और गोपियाँ उन्हें ढूँढ़ती थीं। कभी श्रीकिशोरी जी इसी प्रकार छिप जातीं और सभी उनको ढूँढ़ते थे।
- इमलीतला घाट- आंधेरघाट के उत्तर में इमलीघाट अवस्थित है। यहीं पर श्रीकृष्ण के समसामयिक इमली वृक्ष के नीचे महाप्रभु श्रीचैतन्य देव अपने वृन्दावन वास काल में प्रेमाविष्ट होकर हरिनाम करते थे। इसलिए इसको गौरांगघाट भी कहते हैं।
- श्रृंगारघाट- इमलीतला घाट से कुछ पूर्व दिशा में यमुना तट पर श्रृंगारघाट अवस्थित है। यहीं बैठकर श्रीकृष्ण ने मानिनी श्रीराधिका का श्रृंगार किया था। वृन्दावन भ्रमण के समय श्रीनित्यानन्द प्रभुने इस घाट में स्नान किया था तथा कुछ दिनों तक इसी घाट के ऊपर श्रृंगारवट पर निवास किया था।
- श्रीगोविन्दघाट- श्रृंगारघाट के पास ही उत्तर में यह घाट अवस्थित है। श्रीरासमण्डल से अन्तर्धान होने पर श्रीकृष्ण पुन: यहीं पर गोपियों के सामने आविर्भूत हुये थे।
- चीर घाट- कौतु की श्रीकृष्ण स्नान करती हुईं गोपिकुमारियों के वस्त्रों को लेकर यहीं क़दम्ब वृक्ष के ऊपर चढ़ गये थे। चीर का तात्पर्य वस्त्र से है। पास ही कृष्ण ने केशी दैत्य का वध करने के पश्चात यहीं पर बैठकर विश्राम किया था। इसलिए इस घाटका दूसरा नाम चैन या चयनघाट भी है। इसके निकट ही झाडूमण्डल दर्शनीय है।
- श्रीभ्रमरघाट- चीरघाट के उत्तर में यह घाट स्थित है। जब किशोर-किशोरी यहाँ क्रीड़ा विलास करते थे, उस समय दोनों के अंग सौरभ से भँवरे उन्मत्त होकर गुंजार करने लगते थे। भ्रमरों के कारण इस घाट का नाम भ्रमरघाट है।
- श्रीकेशीघाट- श्रीवृन्दावन के उत्तर-पश्चिम दिशा में तथा भ्रमरघाट के उत्तर में यह प्रसिद्ध घाट विराजमान है। इसका हम पहले ही वर्णन कर चुके हैं।
- धीरसमीरघाट- श्रीचीर घाट वृन्दावन की उत्तर-दिशा में केशीघाट से पूर्व दिशा में पास ही धीरसमीरघाट है। श्रीराधाकृष्ण युगल का विहार देखकर उनकी सेवा के लिए समीर भी सुशीतल होकर धीरे-धीरे प्रवाहित होने लगा था।
- श्रीराधाबागघाट- वृन्दावन के पूर्व में यह घाट अवस्थित है। इसका भी वर्णन पहले किया जा चुका है।
- श्रीपानीघाट-इसी घाट से गोपियों ने यमुना को पैदल पारकर महर्षि दुर्वासा को सुस्वादु अन्न भोजन कराया था।
- आदिबद्रीघाट- पानीघाट से कुछ दक्षिण में यह घाट अवस्थित है। यहाँ श्रीकृष्ण ने गोपियों को आदिबद्री नारायण का दर्शन कराया था।
- श्रीराजघाट- आदि-बद्रीघाट के दक्षिण में तथा वृन्दावन की दक्षिण-पूर्व दिशा में प्राचीन यमुना के तट पर राजघाट है। यहाँ कृष्ण नाविक बनकर सखियों के साथ श्री राधिका को यमुना पार करात थे। यमुना के बीच में कौतुकी कृष्ण नाना प्रकार के बहाने बनाकर जब विलम्ब करने लगते, उस समय गोपियाँ महाराजा कंस का भय दिखलाकर उन्हें शीघ्र यमुना पार करने के लिए कहती थीं। इसलिए इसका नाम राजघाट प्रसिद्ध है।
इन घाटों के अतिरिक्त 'वृन्दावन-कथा' नामक पुस्तक में और भी 14 घाटों का उल्लेख है-
(1) महानतजी घाट (2) नामाओवाला घाट (3) प्रस्कन्दन घाट (4) कडिया घाट (5) धूसर घाट (6) नया घाट (7) श्रीजी घाट (8) विहारी जी घाट (9) धरोयार घाट (10) नागरी घाट (11) भीम घाट (12) हिम्मत बहादुर घाट (13) चीर या चैन घाट (14) हनुमान घाट।








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