शिमला
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शिमला का नाम आते ही
बहुत सारे दृश्य मानस स्थल पर घूम जाते है. ऊँचे पहाड़, देवदार और चीड़ के बड़े-बड़े
वृक्ष, आस-पास मंडराते बादल, ऊँचे-नीचे रास्ते, ठंडी-ठंडी खास पहाड़ी हवा. वैसे तो
ठंडी-ठंडी हवा सभी पहाड़ो पर ही होती है परन्तु शिमला की हवा में कुछ खास ही है.
यहाँ हर थोड़ी देर में बदलता मौसम आपके आसपास के माहौल को मदमस्त बनाये रखता है.
1864 में शिमला को अंग्रेजों की राजधानी बनाया गया था। वो इसलिए क्यूंकि शिमला
ठंडी जलवायु, सुरम्य प्राकृतिक दृश्यों, हिमाच्छादित पहाड़ी दृश्यों,
चीड़ और देवदार के जंगलों
और औपनिवेशिक वास्तु के आकर्षक शहरी भूदृश्य के लिये विख्यात है। देश की आजादी के
एक वर्ष बाद तक यह ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में भारत की राजधानी रहा।
शिमला की समुद्र तल ऊंचाई से 6890 फीट है, शिमला देश के कुछ चुनिदां खूबसूरत हिल स्टेशन में से एक है, जो कि लगभग 12 किमी लम्बाई में फैला हैं। न
सिर्फ भारत में बल्कि पूरी दूनिया में अपने अनुपम सौंदर्य के कारण यह सैलानियों का
प्रिय दर्शनीय स्थल है।
वर्तमान में शिमला भारत के राज्य हिमाचल प्रदेश की राजधानी है.
कब जाएँ
किसी भी पहाड़ पर जाने का आमतौर पर सही समय गर्मियों का ही होता है. शिमला के
साथ भी वैसा ही है. यहाँ गर्मियों के दिनों में दूर-दूर से पर्यटक आते है. उत्तर
भारत में गर्मी की छुट्टियाँ मई-जून के महीने में लगभग 45 दिनों की पड़ती है. इसी
दौरान लोग बच्चों को लेकर शिमला और पहुचते है. जून में शिमला में बहुत ही भीड़ होती
है. होटल्स व अन्य सभी चीजे महंगी हो जाती है. जुलाई में वहा बरिशे शुरू हो जाती
है जोकि लगभग अगस्त-सितम्बर तक चलती है. यहाँ शिमला में बारिश बड़ी ही ज़ोरदार होती
है. यहाँ पुरे हिमाचल में इतनी ज्यादा बारिश होती है कि हमारे यहाँ जैसे गर्मियों
की छुट्टियाँ होती है हिमाचल में बारिशों की छुट्टियाँ होती है. इन दिनों काफी कम
पर्यटक होते है और होटल्स भी सस्ते मिल जाते है. परन्तु बारिश के दिनों में आप
बिना छाता लिए नहीं घूम सकते. बारिश के दिनों में चारो और हरियाली ही हरियाली
दिखेगी. मैंने बारिशों के दिनों में भी वहा कुछ समय बिताया है काफी अच्छा लगता है
वहां.
सर्दियों में पहाड़ की आबोहवा एक अलग प्रकार की होती है. सर्दियों में किसी भी
पहाड़ से जब थोडा सा धुवां उठ रहा होता है तो बहुत ही खूबसूरत नज़ारा होता है. फुल
सर्दी और ऊँचा पहाड़ बहुत ही उम्दा संयोग है. क्यूंकि दिसम्बर के अंत में और जनवरी,
फरवरी में वहा स्नोफाल होता है तो लोग स्नोव्फाल का लुफ्त उठाने के लिए वहां जाते
है.
मेरे हिसाब से किसी भी पहाड़ पर तब जाना चाहिए जब वहां सबसे कम भीड़ हो. क्यूंकि
शिमला में और चंडीगढ़ शिमला रोड पर रोडजाम बहुत लगता है. कई बार तो घंटो रोड जाम
में लोग फंस जाते है. सबसे ज्यादा जाम लगते है मई-जून के महीने में. वैसे तो
चंडीगढ़ शिमला हाईवे को अब काफी चौड़ा किया जा रहा है और इसके बाद तो ट्रैफिक जाम से
निजात मिल जायेगा परन्तु शिमला सिटी के अन्दर लगने वाले ट्रैफिक जाम का अभी तक कोई
विकल्प नहीं है.
शिमला पहुचने के मार्ग
बाई एयर - हवाई जहाज के द्वारा
शिमला में जबरहट्टी में हवाई अड्डा है और यह एअरपोर्ट देश के चुनिन्दा
एयरपोर्ट्स से जुड़ा हुआ है. यहाँ से आप टैक्सी लेकर शिमला सिटी में बड़े ही आराम से
पहुच सकते है. लेकिन ऐसा करने से आप रास्ते में आने वाले प्राकृतिक नजारों से आप
वंचित रह जायंगे.
सड़क मार्ग
दिल्ली से और चंडीगढ़ से व आसपास की अन्य मुख्य शहरों से शिमला के लिए डायरेक्ट
बस सर्विसेज है. आजकल बस सर्विस के लिए भी बहुत से मोबाइल एप है जिनकी मदद से आप
AC/Non AC बस में सीट बुक करवा सकते है. आप बस में भी कुछ प्राकृतिक नजारो का आनंद
ले पाएंगे. और अपनी गाड़ी से तो जा ही सकते है. बल्कि सड़क मार्ग से अपनी गाड़ी में
बस से भी जयादा आनंद आता है.
रेल मार्ग
कालका से शिमला एक रेल लाइन है जोकि आज वर्ल्ड हेरिटेज है. एक बार इस ट्रेन से
अवश्य जाएँ. यह ट्रेन बहुत ही खूबसूरत वादियों से निकलती हुई जाती है. दो फीट छह
इंच की इस नैरो गेज लेन पर नौ नवंबर, 1903 से आजतक रेल यातायात
जारी है। कालका-शिमला रेलमार्ग में 103 सुरंगें और 869 पुल बने हुए हैं। इस मार्ग
पर 919 घुमाव आते हैं, जिनमें से सबसे तीखे मोड़ पर ट्रेन 48 डिग्री के कोण पर घूमती है।
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| Narrow Gaze Train Route |
वर्ष 1903 में अंग्रेजों द्वारा कालका-शिमला रेल सेक्शन बनाया गया था। रेल विभाग
ने 7 नवम्बर 2003 को धूमधाम से शताब्दी समारोह भी मनाया था, जिसमे पूर्व रेलमंत्री नितीश कुमार ने हिस्सा लिया था। इस अवसर पर नितीश कुमार
ने इस रेल ट्रैक को हैरिटेज का दर्जा दिलाने के लिए मामला यूनेस्को से उठाने की
घोषणा की थी। 24 जुलाई 2008 को इसे विश्व धरोहर घोषित किया गया।
कहा ठहरे
मेरे हिसाब से कही भी जाना हो और वहा रुकना हो तो इंतजाम करके ही जाना चाहिए. आजकल तो बहुत से
मोबाइल एप है और वेब साइट्स है जिनसे आप ऑनलाइन होटल्स बुक करवा सकते है. यह मोबाइल
एप और वेब साइट्स आपको कभी कभी बहुत सारा डिस्काउंट भी देते है. परन्तु शिमला यदि
रुकना हो तो माल रोड के आसपास ही रूम बुक करे. वो इसलिए कि वहां घूमने के मुख्य
स्थान - एक तो माल रोड ही है और दुसरे स्थान भी माल रोड से हो के ही जाते है. और
वहा सभी रास्ते इतने ऊँचे-नीचे है कि वहा बैटरी रिक्शा या अन्य कोई इस तरह का
विकल्प है नहीं. यदि आपने होटल माल रोड से नीचे कही लिया है तो आपको माल रोड
पहुचने के लिए काफी चलना पड़ेगा.
बस स्टैंड के पास 2-3 धर्मशाला भी है जहाँ आप उचित मूल्य पर रुक सकते है. शिमला
में घुसते ही आपको बहुत सारे कुली घेर लेंगे जोकि आपको काफी सस्ते होटल्स दिलवाने
की बात कहेंगे. परन्तु उनके द्वारा बताये गए होटल्स चीप क्वालिटी के होते है और
माल रोड से दूर होते है.
किन किन बातों का खयाल रखे
शिमला में गर्मियों में पानी की काफी कमी रहती है इसलिए जो भी होटल बुक करे तो
यह सुनिश्चित कर ले कि वहा आपको पानी प्रयाप्त मात्रा में मिलेगा या नहीं.
अगर आप बीमार नहीं भी रहते है तो भी जरुरत की मेडिसिन अपने साथ अवश्य लेकर
जाएँ.
शिमला में घूमने के रास्ते काफी ऊँचे-नीचे है इसलिए स्पोर्ट-शू साथ लेकर जाएँ
या डाल कर जाएँ.
बारिश में जाएँ तो छाता लेकर जाना कभी मत भूले.
जाखू हिल पर जहाँ हनुमान जी का मंदिर है वहां बन्दर काफी संख्या में होते है
वहां हाथ में कोई भी थैला या बैग मत लेकर जाये, बन्दर कभी भी आकर झपट्टा मार सकते
है.
जब जाखू हिल से उतर रहे हो तो भागते हुए उतरने की भूल मत करे क्यूंकि उस वक्त
आपका मोमेंतेम/सवेंग इतना ज्यादा हो जाता है कि आप रुकना चाहे तो भी रुक नहीं
पाएंगे. इसलिए ध्यान से चले.
क्यां देखे
रिज : शहर के मध्य में एक
बड़ा और खुला स्थान, जहां से पर्वत
श्रंखलाओं का सुंदर दृश्य देखा जा सकता है। यहां शिमला की पहचान बन चुका
न्यू-गॉथिक वास्तुकला का उदाहरण क्राइस्ट चर्च और न्यू-ट्यूडर पुस्तकालय का भवन
दर्शनीय है।
मॉल : शिमला का मुख्य
शॉपिंग सेंटर, जहां रेस्तरां भी
हैं। गेयटी थियेटर, जो पुराने
ब्रिटिश थियेटर का ही रूप है, अब सांस्कृतिक
गतिविधियों का केंद्र है। कार्ट रोड से मॉल के लिए हि.प्र.प.वि.नि. की लिफ्ट से भी
जाया जा सकता है। रिज के समीप स्थित लक्कड़ बाजार, लकड़ी से बनी वस्तुओं और
स्मृति-चिह्नों के लिए प्रसिद्ध है।
काली बाड़ी
मंदिर : यह मंदिर स्कैंडल
प्वाइंट से जनरल पोस्ट ऑफिस से की ओर कुछ गज की दूरी पर स्थित है। माना जाता है कि
यहां श्यामला देवी की मूर्ति स्थापित है।
जाखू मंदिर (2.5 कि.मी.):
शिमला की सबसे ऊंची चोटी से शहर का सुंदर नजारा देखा जा सकता है। यहां "भगवान
हनुमान" का प्राचीन मंदिर है। रिज पर बने चर्च के पास से पैदल मार्ग के अलावा
मंदिर तक जाने के लिए पोनी या टैक्सी द्वारा भी पहुंचा जा सकता है।
राज्य संग्रहालय (3 कि.मी.):
यहां हिमाचल प्रदेश की प्राचीन ऐतिहासिक वास्तुकला और पेंटिंग्स देखे जा सकते हैं।
यह संग्रहालय प्रात: 10 बजे से सायं 5 बजे तक खुलता है तथा सोमवार और राजपत्रित
अवकाशों में यह बंद रखा जाता है।
इंडियन
इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज़ (4 कि.मी.): अंग्रेजी पुनर्जागरण काल में बना यह शानदार भवन पूर्व
वायसराय का आवास हुआ करता था। इसके लॉन और पेड़ यहां की शोभा और बढ़ा देते हैं।
प्रवेश टिकट द्वारा।
प्रोस्पेक्ट हिल (5 कि.मी.)
: कामना देवी मंदिर को समर्पित यह हिल शिमला-बिलासपुर मार्ग पर बायलुगंज से 15
मिनट की पैदल दूरी पर है। हिल से इस क्षेत्र का विहंगम दृश्य दिखाई देता है।
समर हिल (7 कि.मी.) :
शिमला-कालका रेलमार्ग पर एक सुंदर स्थान है। यहां के शांत वातावरण में पेड़ों से
घिरे रास्ते हैं। अपनी शिमला यात्रा के दौरान राष्ट्पिता महात्मा गांधी राजकुमारी
अमृत कौर के शानदार जार्जियन हाउस में रुके थे। यहां हिमाचल प्रदेश विश्वद्यालय
है।
चाडविक फाल्स् (7 कि.मी.):
घने जंगलों से घिरा यह स्थान समर हिल चौक से लगभग 45 मिनट की पैदल दूरी पर है।
संकट मोचन (7 कि.मी.) :
शिमला-कालका सड़क मार्ग पर (N.H - 5) पर "भगवान हनुमान" का प्रसिद्ध
मंदिर है। यहां से शिमला शहर का सुंदर दृश्य दिखाई देता है। यहां बस/टैक्सी द्वारा
पहुंचा जा सकता है।
खाना-खजाना
यहाँ खाने के लिए
आपको बहुत सी लज़ीज़ व्यंजन मिल जायेंगे. यहाँ के परांठे, पेस्ट्री, पेटीज बहुत ही
खास है. छोटे-बड़े यहाँ हर प्रकार के रेस्तरां है जहाँ आपको उचित रेट पर खाना मिल
सकता है. माल रोड के पास ही एक और छोटी सी मार्केट है कुछ सीढियाँ उतर कर जाना
होता है. यह एक प्रकार का फ़ूड पॉइंट है. यहाँ बिलकुल सामने एक छोटी सी चाय की
दूकान है यहाँ आपको परांठे भी खाने को मिलते है और यह परांठे बहुत ही स्वादिष्ट
होते है. यहाँ इस दूकान की बालूशाही बहुत ही टेस्टी है. एक बार जरुर से जरुर try
करें.
इसके इलावा माल रोड
पर शेरे-पंजाब रेस्तरां है, यहाँ का खाना काफी हाईजेनिक और स्वादिष्ट होता है. मॉल
रोड पर तरह तरह की खाने की चीजे मिल जाती है. एक यहाँ साउथ इंडियन रेस्तरां भी है
माल रोड पर एकदम स्वादिष्ट और हाईजेनिक खाना परोसा जाता है इस रेस्तरां में. आपको
माल रोड पर हर तरह के रेस्तरां मिल जायेंगे जहाँ आप बैठकर आनंदपूर्वक खाने का मज़ा
ले सकते है.
माल रोड
यहाँ का माल रोड
वाकई में खास है. शिमला में आकर सभी लोग माल रोड पर ही समय बिताते है. यहाँ माल
रोड पर सब कुछ है लज़ीज़ खाना, काफी, चाय, स्नैक्स, फास्टफूड, मौसम का मज़ा, घुमने का
मज़ा, गर्मियों के दिनों में रिज, जोकि शहर के
मध्य में एक बड़ा और खुला स्थान, जहां से पर्वत
श्रंखलाओं का सुंदर दृश्य देखा जा सकता है, पर गीत संगीत कार्यकर्म चलता है जहाँ
पर कोई भी जाकर गाना गा सकता है. इसके इलावा यही पहाड़ी लोग तरह तरह का सामान बेचते
नज़र आते है.
यहाँ भुने हुए भुट्टे मिलते है माल रोड पर, एकदम मस्त, गर्म-गर्म मसालेदार.
माल रोड पर ही घोड़े लिए हुए पहाड़ी लोग मिलते है, इन घोड़ो पर लोग घुड़सवारी का लुफ्त
उठाते है. यहाँ माल रोड पर कोई भी व्हीकल चलाना मना है. यह रोड केवल और केवल पैदल
चलने वालों के लिए ही है.
| Mall Road Shimla |
लोग यहाँ पर पहाड़ी वेशभूषा में फोटो करवा रहे होते है. पहाड़ी costume व
फोटोग्राफर दोनों ही सही दामो पर उपलब्ध है यहाँ.
बच्चो के खेलने के लिए गेम पार्लर है यहाँ.
लक्कड़ बाज़ार
शिमला में माल रोड से ही सटा हुआ एक मार्केट है जिसका नाम है लक्कड़ बाज़ार.
यहाँ आपको लक्कड़ी से बन हुआ घरेलु सामान मिल जायेगा. बस कोई भी सामान खरीदते हुए
थोडा मोलभाव अवश्य करें क्यूंकि रेट्स में काफी उतार-चढ़ाव रहता है.
तिब्बती बाज़ार
नीचे बस स्टैंड या रेलवे स्टेशन से आते हुए रास्ते में एक तिब्बती बाज़ार पड़ता
है जहाँ आपको तरह तरह का सामान खरीदने को मिलेगा. इस बाज़ार में ज्यादातर दुकाने
तिब्बती महिलाओ के द्वारा चलाई जाती है. यहाँ भी कुछ ख़रीदे तो मोलभाव करके ही
ख़रीदे.


Yaari Dosti Status Shayari in Hindi
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